Wednesday, February 20, 2013

हुक्मरान .......

The Patiala Girls pain ....... 

...........................................................


अब जो हुक्मरान कभी शोक सभा में आयें, 
हो शर्मसार अगर मेरी चिता पर आयें ,

उनको आने दो समझ लेने दो सुन ने दो ज़रा,
आँख से सत्ता की पट्टी को भी खुलने दो ज़रा,
देश तो जागा है इनको भी तो जगने दो ज़रा,
शाहे आलम को रियाया से तो मिलने दो ज़रा 

दिल मैं है आग, तपिश थोड़ी सी ये भी पायें,
अब जो हुक्मरान कभी शोक सभा में आयें I

कहते है हम भी हैं माँ, बेटी भी , तुम सब की तरहा,
हम भी सब जानती हैं इतना भी ग़ाफिल समझो,
कहना वो ठीक है, पर देखी है पुलिस चौकी कोई,
बात उन भेडिओं से की है जो बिठाये हैं वहाँ। 
कहते थे रेप हुआ भी तो क्या पैसे ले लो,
या की फिर जा के उसी वहशी से शादी कर लो
है बड़े बाप का बेटा, जो किया ठीक किया,
तुम ही दोषी हो ये हम कहते हैं हामी भर लो . . . . . . 

हैं तुम्हारे ही कारिंदे तुम्हें क्या समझाएं,
अब जो हुक्मरान कभी शोक सभा में आयें

पूछना उनसे कभी जाके पुलिस थाने में,
देखा है कैसे जो बैठे हैं वहाँ उन के लिए,
लुट के आई है जो वो अबला नहीं जिस्म है इक,
ये उस अबला को भी लूटेंगे लुटेरों को भी,
वो पुलिस थाना नहीं मंडी है बस उनके लिए,

ये शिखंडी हैं किसी बात से ने शर्मायें,
अब जो हुक्मरान कभी शोक सभा में आयें

मैंने भी जीना तो चाहा था बड़ी हसरत थी ,
मैं भी बेटी थी बहन थी मेरी भी अस्मत थी,
पर जो कानून कहा जाता है गिरवी है कहीं
है बड़ा महंगा ये इन्साफ कहाँ हम जाएँ ,
हम गरीबों पे पैसा कोई इज्ज़त थी।

सत्ता के ताले को हम जा के कहाँ खुलवाएं
अब जो हुक्मरान कभी शोक सभा में आयें

...........................Patiala Girl who is no more .....